#Millets #मिलेट्स (सिरिधान्य) क्या है और क्या हैं इन्हें खाने के लाभ, पढ़िए पूरी जानकारी


मिलेट एक प्रकार का प्राचीन अनाज है जो दो तरह के अनाजों से बनता है एक तो मोटे अनाज वाला होता है जो Poaceae परिवार के अंतर्गत आता है, और दूसरा तरह छोटे दानों वाला अनाज (Millets in Hindi) होता है जो भी Poaceae परिवार से सम्बंधित होता है। अधिकांश लोगों को मिलेट से बाजरे का संबंध याद आता है, जो मिलेट में सबसे ज्यादा लोकप्रिय होने के कारण होता है।

यह भारत, नाइजीरिया और अन्य एशियाई और अफ्रीकी देशों जैसे देशों में उगाया जाता है यह एक छोटा, गोल और साबुत अनाज है जिसे बहुत कम पानी में उगाया जा सकता है मोटे अनाज भी रक्तचाप को कम कर सकते हैं और गैस्ट्रिक अल्सर और पेट के कैंसर के खतरे को कम कर सकते हैं बाजरा कब्ज, सूजन और मोटापे को कम करने में भी मदद कर सकता है।

बाजरा फाइबर, कैल्शियम, आयरन, मैग्नीशियम और फास्फोरस जैसे पोषक तत्वों से भरपूर होता है, जो इसे एक संपूर्ण अनाज बनाता है जो विभिन्न तरीकों से आपके स्वास्थ्य को लाभ पहुंचा सकता है।

भारत ने अंतर्राष्ट्रीय समुदाय के समर्थन से 72 देशों के सहयोग से 2023 को अंतर्राष्ट्रीय पोषक अनाज वर्ष के रूप में घोषित किया है। इस अवसर पर दुनिया भर में कई आयोजन हो रहे हैं जिनमें मोटे अनाजों से जुड़े विषयों पर विस्तृत चर्चा हो रही है। भारत में भी इस अवसर को ध्यान में रखते हुए कई तैयारियां चल रही हैं।

अधिकतर राज्य सरकारें किसानों को मोटे अनाज उगाने के लिए प्रेरित कर रही हैं और साथ ही लोगों को थाली तक इसे पहुंचाने के लिए भी जागरूकता फैलाई जा रही है। इसका मुख्य उद्देश्य है लोगों को मिलेट जैसे पोषक अनाजों के बारे में जागरूक करना, खासतौर पर शहरों में जहां गेहूं और चावल की प्रचलनता ज्यादा होती है।

इस चुनौतीपूर्ण काम में थालियों तक 10 प्रकार के पोषक अनाजों को पहुंचाना एक महत्वपूर्ण कदम है। इसलिए, (Millets in Hindi) मिलेट के प्रोसेस्ड फूड उत्पादों को बढ़ावा दिया जा रहा है। इन उत्पादों को बनाने के लिए भारत में कई संगठनों और कंपनियों ने काम शुरू किया है। इनमें से कुछ उदाहरण हैं – सोलरी, प्रथम दाना, इंडियन मिलेट अंडर्सटैंडिंग एंड डेवलपमेंट सोसाइटी (IMAD), आदि। इन संगठनों द्वारा मिलेट से बने प्रोसेस्ड फूड उत्पादों का विस्तार किया जा रहा है ताकि इसे लोगों तक आसानी से पहुंचाया जा सके।

इसके साथ ही, सरकार भी इस मुहीम में अहम भूमिका निभा रही है। कुछ राज्यों में मिलेट की खेती को बढ़ावा दिया जा रहा है और सरकार उन किसानों को भी सहायता प्रदान कर रही है जो मिलेट की खेती करते हैं इसके साथ ही, सरकार ने भी कुछ सुविधाएं प्रदान की हैं जैसे कि उत्पादन और परिपक्वता अनुदान आदि जिससे कि मिलेट से बने उत्पादों का विकास और उन्हें विश्व भर के बाजार में प्रवेश मिल सके।

इस तरह से, भारत अपनी ग्रामीण क्षेत्रों में मिलेट की खेती को बढ़ावा देने और उससे बने उत्पादों का विकास कर उन्हें विश्व भर में प्रवेश दिलाने के लिए कड़ी मेहनत कर रहा है।

अनाज को तीन श्रेणी में रखा गया है।

Negative Grains : इनका लगातार सेवन करते रहने से भविष्य में कई तरह की बीमारियों की सम्भावना रहती है जैसे-  गेहूं, चावल।

Neutral Grains : ये मोटा अनाज कहलाता है। इनके सेवन से शरीर में न कोई बीमारी होती है और न ही कोई बीमारी हो तो वह ठीक होती है। यह शरीर को स्वस्थ रखता है ये अनाज ग्लूटेन मुक्त होते हैं जैसे- बाजरा, ज्वार रागी और प्रोसो।

Positive Grains : पॉजिटिव ग्रेन्स के अंतर्गत छोटे अनाज आते हैं। इन्हें सिरिधान्य भी कहा जाता है जैसे- कंगनी, सामा, सनवा, कोदो और छोटी कंगनी

Neutral grains और positive grains को संयुक्त रूप से मिलेट कहा जाता है। अब हम आगे मिलेट्स के प्रकार (Types of Millets in Hindi) के बारे में बात करेंगे।


पॉजिटिव मिलेट क्या है | What is Positive Millet in Hindi ?

पॉजिटिव मिलेट उन अनाज को कहा जाता है जो पॉजिटिव ग्रेन्स के अंतर्गत आते हैं। इन्हें सिरिधान्य भी कहा जाता है। सभी पॉजिटिव मिलेट पोएसी फैमिली के अंतर्गत आते हैं। ये अनाज कई प्रकार की बीमारियों को ठीक करने की क्षमता रखते हैं। ये अनाज आकार में बहुत छोटे होते हैं। पॉजिटिव मिलेटस फाइबर से भरपूर होते हैं। इन्हें पकाने से पहले 6 से 8 घंटे पानी में भिगोकर रखना होता है ताकि उनके फाइबर नरम हो सके। इन मिलेट्स को मिक्स करके नहीं पकाया जाता पॉजिटिव मिलेट के अंतर्गत पांच मिलेट आते हैं-

1. Foxtail Millet ( कंगनी)

2. Little Millet ( सामा, कुटकी)

3. Barnyard Millet ( सांवा, सनवा)

4. Kodo Millet ( कोदो)

5. Browntop Millet (छोटी कंगनी हरी कंगनी )


 विभिन्न प्रकार के मिलेटस | Different Types of Millets in Hindi | Millet in hindi name

यहाँ 9 तरह के पाए जाने वाले मिलेटस (9 Types of Millets in Hindi) के बारे में बताया गया है जिनको Siridhanya (सिरिधान्य) भी कहते हैं


1. ‘पुनर्वा’ बाजरा (Proso Millet) 

2. ज्वार (Sorghum Millet)

3. बाजरा  (Pearl Millet)

4. रागी (Finger Millet)

5. सांवा या सनवा बाजरा  (Barnyard Millet)

6. कोदो बाजरा (Kodo Millet)

7. छोटी कंगनी हरी कंगनी बाजरा  (Browntop Millet)

 8. कंगनी बाजरा (foxtail millet)

 9. कुटकी बाजरा (Little millet)


पुनर्वा बाजरा (Proso Millet):

पुनर्वा बाजरा (Proso Millet) एक प्रकार का अनाज होता है जो धान के समान उत्पादित किया जाता है। इसका वैज्ञानिक नाम “Panicum miliaceum” है। इसकी खेती दक्षिण एशिया, यूरोप और अफ्रीका में व्यापक रूप से की जाती है प्रोसो बाजरा के दाने छोटे होते हैं और सफ़ेद रंग के होते हैं। इसमें कई पोषक तत्व और विटामिन्स होते हैं जैसे कि प्रोटीन, फाइबर, विटामिन B6, फॉलिक एसिड और नियासिन। इसके अलावा, कुछ मिनरल्स जैसे कि कैल्शियम, आयरन, मैग्नीशियम, फॉस्फोरस, पोटैशियम और सोडियम होते हैं।

ज्वार (Sorghum):

ज्वार एक अहम खाद्य फसल है जो कि कई प्रजातियों में उगाई जाती है। इसमें से अधिकतर प्रजातियों का उपयोग पशुओं के चारे के रूप में होता है। हालांकि, sorghum bicolor नाम की एक ज्वार प्रजाति को खाने के लिए भी इस्तेमाल किया जाता है। ज्वार अनेक पोषक तत्वों से भरपूर होता है जैसे विटामिन बी, मैग्नेशियम, फ्लेवोनॉइड, फेनोलिक एसिड और टैनेन।

बाजरा (Pearl Millet):

बाजरा (Pearl Millet) एक मोटा अनाज है जो सबसे ज्यादा उगाया जाता है और सबसे ज्यादा खाया जाता है। भारत और अफ्रीका में बाजरे की सबसे अधिक खेती होती है। इसे बजरी या कंबू के नाम से भी जाना जाता है। बाजरा को कम सिंचाई वाले इलाकों में भी उगाया जा सकता है और यह उन इलाकों के लिए एक वरदान है बाजरे के दाने को अलग करने के बाद, इसे पशुओं के चारे के रूप में भी उपयोग किया जाता है। इसके अलावा, बाजरे के फसल अवशेषों से जैव ईंधन बनाया जाता है।

बाजरे में प्रोटीन, फाइबर, अमीनो एसिड जैसे कई न्यूट्रिएंट्स होते हैं जो स्वस्थ आहार के रूप में उपयोगी होते हैं। बाजरे से ब्रेड, दलिया, कुकीज और अन्य विभिन्न व्यंजन बनाए जाते हैं।

रागी (Finger Millet):

रागी (Finger Millet) एक प्रकार का अनाज है रागी को मडुआ और नाचनी नाम से भी जाना जाता है। इसे इंग्लिश में Finger Millet कहते हैं। यह राई के दाने की तरह गोल, गहरे भूरे रंग का चिकना दिखता है। आयरन से भरपूर रागी रेड ब्ल्ड सेल्स में हीमोग्लोबिन का उत्पादन करने के लिए एक जरूरी ट्रेस मिनरल है अन्य अनाजों की तुलना में कम जगह लेता है

इसमें विटामिन सी, कैल्शियम, पोटैशियम, आयरन और फाइबर जैसे विभिन्न पोषक तत्व मौजूद होते हैं। रागी का सेवन शरीर के लिए बहुत फायदेमंद होता है। यह हृदय रोगों को रोकता है, मधुमेह को नियंत्रित रखता है, रक्त शर्करा को कम करता है और डाइजेस्टिव सिस्टम को स्वस्थ रखता है।

सांवा या सनवा बाजरा (Barnyard Millet):

बार्नयार्ड को हिंदी में सांवा या सनवा कहते हैं। यह बार्नयार्ड के नाम से ज्यादा प्रचलित है। यह पांच पॉजिटिव मिलेट में से एक है। यह कम समय में तैयार होने वाली फसल है। 45 से 60 दिन के अंदर यह काटने के लिए तैयार हो जाता है। इसमें फाइबर, प्रोटीन, कैल्शियम, फास्फोरस, और आयरन जैसे पोषक तत्व मौजूद होते हैं। बरनीर्ड बाजरा ग्लूटेन-फ्री होता है, जिससे यह ग्लूटेन एलर्जी वाले लोगों के लिए एक अच्छा विकल्प होता है।

इसके अलावा बरनीर्ड बाजरा आयुर्वेदिक दवाओं में उपयोग होता है और मधुमेह के मरीजों के लिए एक अच्छी खाद्य पदार्थ होता है। इसके सेवन से वजन घटाने में मदद मिलती है और साथ ही यह शरीर के कोलेस्ट्रॉल स्तर को नियंत्रित करने में भी मदद करता है। बरनीर्ड बाजरा की खीर, उपमा, और दोसा जैसी विभिन्न पकवान बनाए जाते हैं।

कोदो बाजरा (Kodo Millet):

कोदो बाजरा (Kodo Millet) एक प्रकार का अनाज है जो पांच पॉजिटिव मिलेट में से एक है। हिंदी में इसे कोदों या केद्रव कहा जाता है। इसका रंग लाल होता है और इसमें औषधीय गुण पाए जाते हैं जो कफ और पित्त दोष को शांत करते हैं। कोदो मिलेट को ब्लड प्यूरीफायर कहा जाता है क्योंकि इससे डायबिटीज, हार्ट डिजीज, कैंसर और पेट संबंधी समस्याओं से निजात पाया जा सकता है। इसका सेवन लिवर और किडनी के लिए भी फायदेमंद होता है और किडनी संबंधी रोगों के इलाज में इसका उपयोग किया जाता है।

छोटी कंगनी / हरी कंगनी बाजरा  (Browntop Millet):

ब्राउनटॉप एक पॉजिटिव मिलेट है जिसकी ऊपरी परत ब्राउन रंग की होती है, जिसे इसके नाम के रूप में उल्लेख किया जाता है। इसे हरी कंगनी और छोटी कंगनी भी कहा जाता है क्योंकि इसकी धातुओं का रंग हल्का हरा होता है। यह फाइबर और पोषक तत्वों से भरपूर होता है और ग्लूटेन मुक्त होने के कारण इसे अलर्जी वाले लोग भी सेवन कर सकते हैं।

इसके विटामिन ए और विटामिन सी के साथ-साथ विटामिन B 17 भी होता है जो कैंसर से लड़ने में मदद करता है। ब्राउनटॉप के सेवन से डायबिटीज, हृदय रोग और पेट संबंधी समस्याएं ठीक होती हैं। इसका सेवन एडिक्शन से रिकवरी करने में भी मदद करता है।

कंगनी बाजरा (Foxtail Millet):

कंगनी बाजरा, जिसे Foxtail Millet भी कहा जाता है, एक पॉजिटिव मिलेट होता है जो प्राचीन फसलों में से एक है। इसकी खेती दक्षिण भारत में की जाती है। इस छोटे पीले दाने वाले अनाज में फाइबर की मात्रा अच्छी होती है और यह प्रोटीन का एक अच्छा स्रोत होता है। कंगनी में एमिनो एसिड्स, प्लांट कंपाउंड्स, विटामिन्स और कई मिनरल्स भी पाए जाते हैं। इसके सेवन से शरीर को विभिन्न पोषक तत्वों की आवश्यकता पूरी होती है और कई फायदों का लाभ मिलता है।

कुटकी बाजरा (Little Millet):

कुटकी बाजरा एक प्रकार का पॉजिटिव मिलेट होता है जो भारत में प्रचलित है। यह एक छोटा दाना होता है जो सफेद रंग का होता है। इसकी खेती भारत में की जाती है और इसे मुख्य रूप से जंगली भूमि में उगाया जाता है। कुटकी बाजरा ग्लूटेन-फ्री होता है जो उन लोगों के लिए उपयोगी होता है जो ग्लूटेन से पीड़ित होते हैं। इसमें फाइबर, प्रोटीन और भी अनेक पोषक तत्व होते हैं जो इसे स्वस्थ खाद्य पदार्थ बनाते हैं। यह विभिन्न बीमारियों से बचाव करने में मदद करता है जैसे कि मधुमेह, हृदय रोग और कैंसर।

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