मधुमेह में शहद का प्रयोग


मधुमेह रोगियों को शहद खाना चाहिए या नहीं खाना चाहिए इसे लेकर काफी भ्रम की स्थिति रहती है। लेकिन शहद में प्राकृतिक मिठास होने के कारण मधुमेह रोगी इसे खा सकते हैं। मधुमेह रोगियों को हाइपोग्लाइसिमिया की स्थिति  में शहद खाने की सलाह दी जाती है। हाइपोग्लाइसिमिया तब होता है जब आपका ब्लड शुगर काफी कम हो जाता है। लो ब्लड शुगर में अगर व्यक्ति को सही उपचार नहीं मिले तो वो 8 घंटे की अंदर मर भी सकता है। रोगियों के लिए जितना खतरनाक हाई ब्लड शुगर होता है उतनी ही खतरनाक लो ब्लड शुगर भी है। शहद में वे सारे गुण होते हैं जो रक्त में ग्लूकोज का स्तर बढ़ाते हैं और उसके दुष्प्रभावों से रोगियों का बचाते हैं।

शहद का प्रयोग युगों-युगों से होता आया है। शहद को हजम करने की आवश्यकता नहीं होती यह एक स्वयं पचा हुआ पोषक आहार है। इसके सेवन से शरीर को सीधे तौर पर उर्जा मिलती है जिसका उपयोग बच्चे, बूढ़े, जवान और रोगी सभी कर सकते है। 

शहद या मधु एक प्राकृतिक पदार्थ है, जो मधुमक्खियों द्वारा फूलों के रस को चूसकर तथा उसमें अतिरिक्त पदार्थों को मिलाने के बाद छत्ते के कोषों में एकत्र किया जाता है। मधुमेह रोगी आमतौर पर शहद का प्रयोग नहीं कर सकते है। क्योंकि शहद उनके लिए अनुकूल नहीं है। लेकिन मधुमेह रोगी एक विशेष प्रकार के शहद का इस्तेमाल कर सकते है। नीम के पेड़ों के फूल से बने हुए शहद का। इस शहद का उपयोग मधुमेह रोगी कर सकते है, पर कम मात्रा में, ज़्यादा मात्रा में नहीं। क्योकि ज्यादा मात्रा में शहद का इस्तेमाल मधुमेह रोगी को नुकसान पहुंचा सकता है।
 
क्या है हाइपोग्लाइसिमिया  

हाइपोग्लाइसीमिया वह अवस्था है जब रोगी में ब्लड शुगर का स्तर काफी कम हो जाता है। अगर रोगी का ब्लड शुगर 70 एमजी/डीएल हो जाए तो वह लो ब्लड शुगर का शिकार माना जाएगा। ब्लड शुगर अगर एक स्तर से नीचे चला जाए तो यह खतरनाक हो सकता है। हाइपोग्लाइसीमिया तब होता है जब रोगी का शरीर ज्यादा ग्लूकोज इस्तेमाल करने लगता है और उस अनुसार रक्त में ग्लूकोज के बनने की प्रकिया काफी धीमी हो जाती है। इसके अलावा रक्त में ज्यादा इंसुलिन निकलने से भी यह समस्या हो जाती है।  

मधुमेह रोगी के लिए शहद का प्रयोग करने के तरीके

शहद कि गुणवत्ता मधुमक्खियों द्वारा बनाये जाने वाले छत्ते के स्थान पर निर्भर करता है छत्ते के आसपास लगे फूलों के गुण शहद में संचित रहते है। जामुन पर लगे छत्ते का शहद मधुमेह के लिए अधिक उपयोगी होता है। शहद शीघ्र हजम होकर रक्त में मिल जाता है। शहद को दूध, दही, पानी, सब्जी, सूप, फलों के रस में मिलाकर सेवन कर सकते हैं। 
मधुमेह में आंवले के रस में हल्दी व शहद मिलाकर सेवन करने से भी मधुमेह रोगी को फायदा मिलता है।


मधुमेह में शहद के लाभ

अगर मधुमेह रोगी रोज सुबह खाली पेट तुलसी के ताजे पत्तों के रस में शहद मिलाकर पीएं तो उनमें लो ब्लडशुगर की समस्या कुछ ही दिनों में ठीक हो जाती है।
शहद में कार्बोहाइर्ड्रेट, कैलोरी और कई तरह के माइक्रो न्यूट्रिएंट काफी मात्रा में पाये जाते है, जो मधुमेह के लिए लाभकारी होता है। जिन लोगों को मधुमेह की शिकायत होती है उन्हें चीनी की जगहं पर शहद खाने की सलाह दी जाती है।
मधुमेह के रोगियों को रोजाना ताजे आंवले के रस या सूखे आंवले के चूर्ण में हल्दी के साथ शहद मिलाकर खाने से काफी फायदा होता है।
आंवले के रस में हल्दी व शहद मिलाकर खाने से मधुमेह रोगियों को काफी फायदा मिलता है।
मधुमेह रोगियों को रात को सोने से पहले 10 ग्राम शहद और 10 ग्राम त्रिफला के चूर्ण को एकसाथ मिलाकर गर्म पानी के साथ पीना चाहिए। 
शहद शुगर की मात्रा और कोलस्ट्रोल को नियंत्रित करता है। 
शहद शरीर को ऊर्जावान बनाता है। इसलिए कम मात्रा में इसका सेवन मधुमेह में लाभकारी होता है।

मधुमेह रोगी के लिए हर रोज एक चम्मच शहद का सेवन ही फायदेमंद है, शहद का अधिक मात्रा में सेवन फायदे की बजाए नुक्सान कर सकता है ।

3 comments:

  1. बहुत उपयोगी जानकारी दी है |

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  2. bahut hi upyogi jankari mili...............

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  3. बहुत सी भ्रांतियों को दूर करता अच्छा लेख.धन्यवाद्.

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